21 September 2026

Pahad Ka Pathar

Hindi News, हिंदी समाचार, Breaking News, Latest Khabar, Samachar

आईएमपीसीएल बचाने के लिए आंदोलन जारी

आईएमपीसीएल बचाने के लिए आंदोलन जारी

उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र में स्थित आईएमपीसीएल (Indian Medicines Pharmaceutical Corporation Limited) केवल एक औषधि निर्माण इकाई नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, रोजगार, किसानों और भारत की प्राचीन परंपराओं का एक महत्वपूर्ण आधार है।
आईएमपीसीएल वर्षों से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य कर रही है। जब पूरा विश्व प्राकृतिक चिकित्सा और पारंपरिक औषधियों की ओर आकर्षित हो रहा है, तब ऐसे संस्थानों का संरक्षण राष्ट्रीय हित का विषय होना चाहिए। आईएमपीसीएल बचाने के लिए आंदोलन जारी
इस संस्थान से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता है, किसानों की औषधीय फसलों की खरीद होती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। यदि इस प्रकार के संस्थान कमजोर होते हैं, तो इसका प्रभाव केवल कर्मचारियों पर नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था पर पड़ता है।

See also  बदरीनाथ में देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल में शामिल हुए सीएम धामी

विशेष चिंता का विषय यह है कि पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पहले से ही सीमित हैं। ऐसे में आईएमपीसीएल जैसी इकाइयाँ पलायन रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि रोजगार के ये साधन समाप्त होते हैं तो युवाओं का गांव छोड़कर शहरों की ओर जाना और बढ़ सकता है।
जनप्रतिनिधियों, सांसदों, विधायकों तथा राज्य और केंद्र सरकारों का दायित्व है कि वे जनता की चिंताओं को सुनें और इस विषय पर स्पष्ट संवाद स्थापित करें। लोकतंत्र में जनता को यह जानने का अधिकार है कि आईएमपीसीएल के भविष्य को लेकर क्या योजनाएँ हैं और स्थानीय हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। यह केवल एक कंपनी का प्रश्न नहीं है। यह रोजगार, किसानों, ग्रामीण विकास, आयुर्वेद एवं यूनानी विरासत और उत्तराखण्ड के भविष्य का प्रश्न है। इसलिए आवश्यक है कि सभी पक्ष मिलकर समाधान खोजें और जनहित को सर्वोपरि रखें।
आईएमपीसीएल बचेगी तो रोजगार बचेगा, किसान बचेगा, गांव बचेगा और हमारी प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा विरासत भी सुरक्षित रहेगी।

See also  सीएम धामी का कल बदरीनाथ दौरा