उत्तराखंड की बदरीनाथ सीट से विधायक राजेंद्र भंडारी की विधानसभा सदस्यता कभी भी जा सकती है। राजेंद्र भंडारी के बीजेपी में शामिल होते ही उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने विधानसभा अध्यक्ष ऋति खंडूरी को चिट्टी लिखकर राजेंद्र भंडारी की सदस्या रद्द करने की मांग की है। करन माहरा ने इसके लिए दल बदल कानून का हवाला दिया है।
यानी दल बदल कानून के तहत भंडारी को विधानसभा की सदस्यता से हाथ धोना ही पड़ेगा। माना जा रहा है कि सदस्यता जाने के बाद जब भी बदरीनाथ सीट पर उपचुनाव होगा बीजेपी राजेंद्र भंडारी को ही अपना उम्मीदवार बनाएगी। पिछले महीने ही महेंद्र भट्ट ने खुले तौर पर कहा था कि कांग्रेस के जो भी विधायक बीजेपी में आना चाहते हैं उनका स्वागत है। महेंद्र भट्ट ने ये भी कहा था कि कांग्रेस छोड़कर आने वाले विधायकों को बीजेपी अपने सिंबल पर दोबारा विधानसभा भेजेगी। भट्ट के इस बयान के बाद ही राजनीतिक हलचल बढ़ी अब भंडारी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। अभी भी कुछ विधायकों के बीजेपी में जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। यानी दलबदलू नेताओं की हसरतें अभी भी हिलोरें मार रही हैं। बड़ा सवाल यही है कि क्या उत्तराखंड की जनता दलबलू नेताओं पर कब तक भरोसा करेगी? सवाल ये भी है कि आखिर उत्तराखंड में पाला बदलने वाली ये राजनीति राज्य को किस दिशा में ले जा रही है? दलबदलू नेताओं को जिताकर क्या जनता का भला हो पाएगा?

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