24 July 2026

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अंकिता भंडारी केस की सीबीआई जांच की सिफारिश, हरीश रावत ने उठाए क्या सवाल?

अंकिता भंडारी केस की सीबीआई जांच की सिफारिश, हरीश रावत ने उठाए क्या सवाल?

उत्तराखंड सरकार ने अंकिता भंडारी मर्डर केस की सीबीआई जांच की सिफारिश की है। अभी केंद्र सरकार को इस पर फैसला लेना है मगर उससे पहले की कई सवाल उठने लगे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि  अंकिता हत्याकांड की जांच सीबीआई करेगी। यह राज्य के जनमत की आंशिक जीत है, इसको हम अधूरी जीत भी नहीं कह सकते हैं। क्योंकि इसके टर्म्स एंड रेफरेंस में जब तक VIP और साक्ष्य नष्ट करना, एक-दो तथ्यों का उल्लेख नहीं होगा, तब तक “ढाक के तीन पात”।

हरीश रावत ने कहा हत्या का मोटिव अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस मामले में उम्र कैद की सजा का आधार मुख्यतः सीसीटीवी कैमरे में जाते वक्त अंकिता साथ थी और आते वक्त अंकिता साथ नहीं थी। शेष साक्ष्य या तो एकत्र नहीं किए गए या मिटा दिए गए। VIP की उपस्थिति को लेकर केवल अंकिता का अपने दोस्त को भेजा गया मैसेज ही एक साक्ष्य है जिसे पुलिस ने जांच में साक्ष्य नहीं माना। उस साक्ष्य का मतलब है VIP, उस VIP को जांच से बाहर रखने का निरंतर प्रयास हुआ है। क्या वह प्रयास अब भी जारी रहेगा ?

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इसलिए कांग्रेस प्रारंभ से ही कह रही है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में या उनकी अध्यक्षता में जब तक CBI की जांच नहीं होगी और साक्ष्य नष्ट करने वाले तथा VIP के खिलाफ FIR दर्ज नहीं होगी आप ज्ञात करो या अज्ञात करो मगर वीआईपी के खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए। तब तक आप SIT से जांच कराओ या CBI से जांच कराओ, होंगे ‘ढाक के दो पात” और मोटिव सिद्ध न हो पाने के कारण यह हत्या को मोटिव VIP को विशेष सेवा देने से अंकिता द्वारा इंकार करना है और माननीय हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में क्या स्थिति वर्तमान हालात में केस की बनी रहेगी? कुछ कह नहीं सकता। दोषियों को बचाने की भूमिका पहले दिन से ही ढाल दी गई जब पटवारी जी द्वारा FIR लिखने से इनकार कर दिया गया। वह भूमिका आज भी जारी है। अब उत्तराखंड की बारी है।

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पूर्व सीएम ने कहा अंकिता और अंकिता जैसी हमारी बेटी चाहे वह शांतरशाह की बेटी हो, चाहे हमारी रूद्रपुर की बेटी हो, कहीं की भी बेटी हो, उन सब बेटियों के गुनहगार भी अभी कानून की गिरफ्त में नहीं हैं। उन पर भी तो उत्तराखंड को कुछ कहना चाहिये और मेरा मानना है कि ऐसे सभी प्रकरण जिनमें उत्तराखंड से निरंतर गुम होती बालिकाओं की बढ़ती संख्या भी सम्मिलित है उसकी जांच भी माननीय सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट की देखरेख में CBI को सौंपी जानी चाहिए।

 

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