उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने केंद्र से गोचर हवाई अड्डे के विस्तारीकरण कर दिल्ली, देहरादून, पंतनगर से नियमित उड़ान की मांग की है। इसे सामरिक महत्व के साथ जीवन सुरक्षा की दृष्टि से भी अहम बताते हुए, एयर-एम्बुलेंस के स्थायी केंद्र के रूप में स्थापित करने की मांग की है।
राज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने देवभूमि के सीमांत क्षेत्रों में विकास और सामाजिक सुरक्षा के लिए अहम हवाई कनेक्टिविटी की तरह केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया। जिसमें उन्होंने कहा, उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और हवाई सेवा की वर्तमान स्थिति में सुधार की बहुत आवश्यक है। राज्य के चमोली जनपद में स्थित गौचर हवाई अड्डा सामरिक और आपदा प्रबंधन की दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील है। 2013 की आपदा के दौरान इसकी उपयोगिता सिद्ध हो चुकी है। थोड़े बहुत निजी ऑपरेटरों के छोटे विमान वहां पहुंचते हैं लेकिन वह पूरी तरह से नकाफी हैं। वर्तमान में यहाँ से नियमित व्यावसायिक उड़ानों का अभाव है, जिससे स्थानीय जनता और बद्रीनाथ एवं केदारनाथ जाने वाले तीर्थयात्रियों को असुविधा होती है।

केदारनाथ और बद्रीनाथ के मध्य स्थित होने के कारण गौचर को ‘हब’ के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे सड़क मार्ग पर दबाव कम होगा और यात्रा सुरक्षित व सुगम बनेगी।
वहीं इनमें सामरिक महत्व महत्व का जिक्र करते हुए कहा, चीन सीमा के निकट होने के कारण गौचर, पिथौरागढ़ और चिन्यालीसौड़ जैसी हवाई पट्टियों का 24/7 क्रियाशील होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य है। वहीं दूसरी तरफ, हवाई कनेक्टिविटी में सुधार से सीमांत क्षेत्रों के पलायन रोकने में भी मददगार साबित होगा। क्योंकि यदि इन क्षेत्रों में नियमित उड़ानें शुरू होती हैं, तो होमस्टे और स्थानीय पर्यटन को पंख लगेंगे।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि गौचर हवाई अड्डे का विस्तार किया जाय और उसे बड़े विमानों की लैंडिंग के अनुकूल बनाया जाए। इसी क्रम में यहाँ से देहरादून, दिल्ली व पंतनगर के लिए नियमित फिक्स्ड-विंग विमान सेवा शुरू की जाए। इसी तरह केंद्र सरकार की ‘उड़ान’ योजना के अगले चरण में गौचर और नैनी-सैनी, पिथौरागढ़ को प्राथमिकता दी जाए और ऑपरेटरों को सब्सिडी के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने हाल में उड़ान योजना के तहत देहरादून से पिथौरागढ़ ने लिए 45 सीटर विमान सेवा शुरू करने के लिए भी केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है।
इसी तरह जीवन सुरक्षा से जुड़ी एक आवश्यक मांग करते हुए कहा कि गौचर को एयर-एम्बुलेंस के स्थायी केंद्र के रूप में स्थापित किया जाए। ताकि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को आपातकालीन उपचार मिल सके क्योंकि उत्तराखंड की हवाई कनेक्टिविटी केवल सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह राज्य की सुरक्षा, आर्थिकी और जीवन रक्षा से जुड़ा विषय है। इसी के मद्देनजर उन्होंने अनुरोध किया कि गौचर सहित राज्य के सभी सीमांत हवाई अड्डों के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए।

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