यमकेश्वर से बीजेपी विधायक रेनू बिष्ट ने अपने विवादित सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर ऐसी सफाई दी है जिसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हैरानी ये है कि विधायक की सफाई की बात उत्तराखंड बीजेपी के अध्यक्ष ने सार्वजनिक भी कर दी। विधायक ने पहले तो गलती की और फिर सफाई में कुछ ऐसा कह दिया जैसा स्कूल के बच्चे कहते हैं। उससे भी बड़ी कमाल की बात है कि अध्यक्ष ने सफाई को सच भी मान लिया। बीजेपी की अंदरूनी सियासत का ये अनदेखा पहलू भी अब जनता के सामने आ गया है।
रेनू बिष्ट ने सफाई में क्या कहा?
विधायक रेनू बिष्ट सफाई देने पूरी तैयारी के साथ बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के घर पहुचीं। विधायक ने क्या कहा ये अध्यक्ष की पोस्ट से समझिये। महेंद्र भट्ट ने लिखा
“यमकेश्वर विधानसभा की विधायक रेनू बिष्ट ने आज मेरे आवास पर भेंट की। उन्होंने पिछले दिनों सोशल मीडिया में चल रहे उनके बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पोस्ट मुझे विश्वास में लिए बिना मेरे नए सहायक द्वारा डाली गई। यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र का जितना भी विकास हुआ वह भाजपा की ही सरकार में ही हुआ है।आपदा की इस घड़ी में उन्होंने मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami जी से मिलकर समस्याओं के समाधान का आश्वासन लिया है।”
विधायक का तर्क समझ से परे
विधायक ने कहा उनके सहयोगी ने बिना पूछे या बिना विश्वास में लिए पोस्ट कर दी। अब सवाल ये है कि क्या रेनू बिष्ट के सहयोगी कांग्रेस या किसी और पार्टी के समर्थक हैं? सवाल ये भी है कि क्या इस तरह के गैरजिम्मेदार लोगों के सहारे विधायक सबकुछ कर रहीं हैं? दरअल बीते दिनों रेनू बिष्ट के सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट की गई जिसमें उन्होंने लिखा कि यमकेश्वर की 20 22 साल तक अनदेखी होती रही, जबकि सच ये है कि यमकेश्वर में आज तक बीजेपी के अलावा कोई जीता ही नहीं। यानि विधायक ने अपनी पार्टी के 2002 से 2022 तक के विधायकों को कठघरे में खड़ा कर दिया। विवाद बड़ा तो पोस्ट को अपडेट भी कर दिया गया।
ये पोस्ट विधायक के अकाउंट से की गई तो संगठन ने जवाब तलब कर लिया आज सफाई भी हो गई अध्यक्ष ने सबको बता भी दिया लेकिन रेनू बिष्ट ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मुलाकात की बात साझा नहीं की। जबकि उन्होंने देहरादून में ही भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की तस्वीर शेयर की।
उसके बाद धामी की तारीफ वाली पोस्ट भी लिखी और यमकेश्वर में हो रहे काम काज की लंबी लिस्ट भी शेयर की। अब सवाल यही है कि क्या रेनू बिष्ट को संगठन का तलब करना अच्छा नहीं लगा या प्रदेश अध्यक्ष ने ज्यादा कड़वी नसीहत दे दी।








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