8 September 2026

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मुख्य सचिव ने वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल को लेकर की अहम बैठक

मुख्य सचिव ने वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल को लेकर की अहम बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने आज सचिवालय में वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल तथा उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के सम्बन्ध में जिलाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने सभी जनपदों को अपने स्थानीय उत्पादों, संस्कृति, परंपराओं और विशिष्ट मेलों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।मुख्य सचिव ने वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल को लेकर की अहम बैठक

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक जनपद अपने किसी एक विशिष्ट पर्व अथवा मेले को वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल के रूप में विकसित करे। इसके लिए प्रत्येक जिले का वार्षिक इवेंट कैलेंडर तैयार किया जाए। उन्होंने स्थानीय स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी सुनिश्चित की जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में उत्तराखण्ड के प्रवासी एवं नॉन-रेजिडेंट उत्तराखण्डियों को भी जोड़ा जाए, ताकि राज्य के स्थानीय उत्पादों और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाया जा सके।

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उन्होंने चमोली के रम्माण मेले को बड़े स्तर पर आयोजित करने एवं उत्तरकाशी के बटर फेस्टिवल जैसे अनूठे आयोजनों को भी व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिए जाने पर जोर दिया। उन्होंने पौड़ी व चमोली में आयोजित होने वाले शरदोत्सव, हरिद्वार महोत्सव, नैनीताल विंटर कार्निवल और मसूरी विंटर कार्निवल को भी और अधिक आकर्षक एवं व्यवस्थित रूप से आयोजित करने पर जोर दिया। उन्होंने चम्पावत में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल एंगलिंग मीट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा उत्तरायणी मेले में एडवेंचर गतिविधियों को बढ़ाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने जनपदवार निर्यात की संभावनाओं की समीक्षा भी की। उन्होंने प्रत्येक जनपद के लिए बेसलाइन डेटा तैयार करने और उसके आधार पर निर्यात संवर्धन की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्यात संवर्धन के लिए प्रमुख सचिव नियोजन की अध्यक्षता में एक स्थायी समिति गठित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस समिति में सचिव उद्योग, वन व आयुुष सहित अन्य हितधारकों को शामिल किया जाए।

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उन्होंने स्थानीय उत्पादों की पहचान कर उनकी प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दिए जाने पर जोर दिया। मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न जनपदों के सफल प्रयोगों और अनुभवों को आपस में साझा किया जाए, ताकि एक जनपद की अच्छी पहल को दूसरे जनपद में भी लागू किया जा सके।

 

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