22 April 2026

Pahad Ka Pathar

Hindi News, हिंदी समाचार, Breaking News, Latest Khabar, Samachar

प्रदूषित गंगा को लेकर गरिमा दसौनी ने सरकार को घेरा

प्रदूषित गंगा को लेकर गरिमा दसौनी ने सरकार को घेरा

उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने राज्य की धामी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है ।दसौनी ने कहा कि क्या अब राज्य के गंगा तट पर अमृत नहीं विषाक्त जल का आचमन होगा? दसौनी ने कहा मां गंगा में गटर का पानी श्रृद्धालुओं की आस्था का अनादर है ।भाजपा सरकारें हमारी ईश्वरीय और वैदिक आस्थाओं से खिलवाड़ कर रही हैं,इतना ही नहीं हिंदुत्व की आड़ में हमारी सनातन संस्कृति पर कुठाराघात कर रही हैं। गरिमा ने कहा कि

दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि हाल ही में एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने देश की भाजपा सरकारों पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि गंगा में सीवेज़ को रोकने के लिए तुरंत सख़्त कदम नहीं उठाया गया तो स्नान व आचमन करने वाले लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित होगा। दसौनी ने कहा कि उत्तराखंड में गंगा का उद्गम स्थल ही प्रदूषित पाया गया। एनजीटी ने उत्तराखंड के जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर करने तक के आदेश दिए, प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र, वाराणसी में असि और वरुणा नदी की दुर्दशा से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान एनजीटी ने काशी में गंगाजल की शुद्धता को लेकर कलेक्टर को फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या आप गंगाजल पी सकते हैं? क्यों नहीं बोर्ड लगा देते हैं कि गंगा का पानी नहाने और पीने योग्य नहीं है?
दसौनी ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT)ने उत्तराखंड को लेकर भी बहुत सख्त टिप्पणी की है,उसके मुताबिक उत्तराखंड में गंगा को उद्‌गम स्थल से ही अपवित्र कर दिया गया है।

See also  आपदा प्रबंधन को लेकर उत्तराखंड और हिमाचल मिलकर करेंगे काम

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 05/11/2024 को उत्तराखंड राज्य में माँ गंगा में मिलाए जा रहे नालों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। एनजीटी के सम्मुख यह तथ्य भी सामने लाया गया कि गंगा के उद्गम स्थल गंगोत्री में जो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट है, जिसमें से गंगा में जल छोड़ा जा रहा है, उसके 1 एमएलडी पानी की जाँच करने पर यह तथ्य प्रकाश में आया है कि इस पानी में FC 540MPN/100ml पाया गया है। जिससे ज्ञात होता है कि यहाँ गंगा उद्गम स्थल से ही प्रदूषित है।
गरिमा कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा दिए गए शपथ पत्र से यह ज्ञात होता है कि उत्तराखंड में कुल 512.23 एमएलडी गंदा पानी निकलता है, कुल 69 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं, जिनकी क्षमता 316.87 एमएलडी पानी को ट्रीट करने की है। अर्थात 195.36 एमएलडी नालों का पानी सीधा गंगा में छोड़ा जा रहा है। इतना ही नहीं, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ कि गंगा से लगे शहरों के 48 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ऐसे हैं, जो मानक स्तर के हैं ही नहीं।

See also  सीएम धामी ने मसूरी रोड पर बन रहे पुल का निरीक्षण किया

दसौनी ने पूरे परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड में भी गंगा में नालों के पानी को मिलाए जाने की भयावहता ऐसी है कि एनजीटी ने 09 फरवरी 2024 के आदेश में यह लिख दिया कि संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए और एफआईआर के आदेश दे दिए। गरिमा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह कहते हैं कि मुझे माँ गंगा ने बुलाया है, पर उसके उलट पिछले दस वर्षों में
उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और देश की डबल इंजन की भाजपा सरकारों ने माँ गंगा की पवित्रता और श्रृद्धालुओं की आस्था पर दोहरा आघात किया है।

See also  आंगनबाड़ी वर्कर्स का आंदोलन 20 दिन से जारी, कीर्तिनगर में कांग्रेस ने दिया समर्थन

गरिमा ने राज्य सरकार से चार सवाल करते हुए कहा कि

1. क्या उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, करोड़ों श्रृद्धालुओं को यह आश्वासन देंगे कि गंगा का जल स्नान और आचमन के योग्य होगा?

2. क्या राज्य सरकार हाई पॉवर कमिटी गठित कर पूरे प्रदेश के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और नालों को गंगा में मिलाए जाने की तथ्यात्मक रिपोर्ट तुरंत एनजीटी में प्रस्तुत करेंगे?

3.क्या पूरी प्रतिबद्धता और दृढ़ इच्छाशक्ति से देश के श्रृद्धालुओं और कांग्रेस की उक्त चिंताओं का सरकार तुरंत संज्ञान लेगी व उनका निराकरण करेगी?

4. क्या राज्य सरकार प्रदेश की जनता को यह बताएगी कि नमामि गंगे के तहत गंगा सफाई के लिए अभी तक पिछले 10 सालों में उत्तराखंड राज्य को कितना बजट मिल चुका है?