हरिद्वार के जमीन घोटाले को लेकर लेफ्ट नेता इंद्रेश मैखुरी ने धामी सरकार पर निशाना साधा है। मैखुरी ने कहा है कि जमीन घोटाले में वर्तमान जिलाधिकारी समेत दो आईएएस व एक पीसीएस अफसर का निलंबन उत्तराखंड में शीर्ष पदों पर व्याप्त भ्रष्टाचार का एक और खुलासा है। जो मुख्यमंत्री रात दिन जमीनों के मसले का सांप्रदायिकीकरण करने के लिए लैंड जेहाद जैस जुमले उछालते रहते हैं, उनके राज में उनके अफसर ही जमीनें खुर्द- बुर्द करने में लगे हैं।
हरिद्वार के जिलाधिकारी पद से निलंबित किये गए अफसर करमेंद्र सिंह के बारे में तो ये भी जांच की जानी चाहिए कि 2020 में उत्तराखंड आने के बाद वे लगातार हरिद्वार ही क्यों जाना चाहते थे? पहले वे हरिद्वार में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के सचिव रहे और फिर घूम फिर कर जिलाधिकारी के रूप में वापस हरिद्वार पहुंच गए। उत्तराखंड में पांच वर्ष के सेवाकाल में अधिकतम समय हरिद्वार में ही रहना भी संदेह पैदा करता है। इसकी भी जांच की जानी चाहिए उत्तराखंड की भाजपा सरकार और उसके समर्थक अफसरों के निलंबन को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में प्रचारित कर रही है ये याद रखा जाना चाहिए कि भाजपा सरकार में ही एन एच 74 के लिए जमीनों की अधिग्रहण में लगभग 500 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ। उसमें भी दो आईएएस निलंबित हुए, लेकिन फिर बहाल हो गए, पी सी एस अफसर जेल भी गए और फिर बहाल हो कर प्रमोशन भी पा गए. उक्त घोटाले के मुख्य आरोपी अफसर के खिलाफ बीते अक्टूबर में पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने ही मुकदमा चलाने की अनुमति वापस लेने की कोशिश की. इसलिए भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के मामले में इस सरकार का रिकॉर्ड संदेहास्पद है और इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता. इसलिए भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई के लिए लगातार दबाव बनाए रखना होगा। राज्य में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है,विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के नेता, पूर्व मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक तक इस बात को सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं. इस साल फरवरी में राज्य की विधानसभा में पेश की गयी नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में करोड़ो रुपए के भ्रष्टाचार का खुलासा किया था. लेकिन किसी एक व्यक्ति पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. ऐसी भ्रष्टाचार में डूबी सरकार और उसके मुखिया को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

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