10 May 2026

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चंपावत केस की जांच पर ज्योति रौतेला ने उठाए सवाल, सरकार और पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

चंपावत केस की जांच पर ज्योति रौतेला ने उठाए सवाल, सरकार और पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

उत्तराखंड महिला कांग्रेस की अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने चम्पावत से लौटने के बाद प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, देहरादून में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए चम्पावत की नाबालिग बालिका से दुष्कर्म प्रकरण को लेकर राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन एवं भाजपा पर गंभीर प्रश्न खडे किए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जहां-जहां भी महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराध सामने आते हैं, वहां भाजपा नेताओं के नाम जरूर जुड़ा रहता है जो कि बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है। उन्होंने हरिद्वार प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि चाहे भाजपा की मण्डल अध्यक्ष अनामिका शर्मा प्रकरण हो, नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष रहे मुकेश बोरा का मामला हो, चम्पावत कमल रावत प्रकरण हो अथवा अंकिता भंडारी हत्याकांड हो, हर मामले में भाजपा से जुडे लोगों के नाम ही सामने आए हैं।

ज्योति रौतेला ने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण में भी भाजपा और सत्ता से जुडे लोगों के नाम सामने आए थे, लेकिन आज तक सीबीआई जांच की वास्तविक प्रगति जनता के सामने नहीं लाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल जांच के नाम पर टाईम पास कर रही है जबकि कई आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं।

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पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने चम्पावत प्रकरण को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि आखिर पीडित और उसके पिता 48 घंटे तक कहां थे? पीडिता को दो दिन में दो बार मजिस्ट्रेट के सामने क्यों पेश किया गया? यदि पीडित पक्ष द्वारा साजिस रची गई तो पुलिस ने क्या पीडिता के पिता के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज की है?

उन्होंने यह भी पूछा कि बरामदगी के समय पीडिता के हाथ बंधे होने की बात यदि सही है तो उसे किस समय खोला गया? जिस स्थान से पीडिता मिली, वहां वो किन लोगों के साथ थी? मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि हुई या नहीं? सोशल मीडिया पर वायरल कथित पत्र की सच्चाई क्या है, जिसमें पीडिता के परिजनों द्वारा समझौते की बात कही जा रही है?  महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यदि मामला पूरी तरह फर्जी था तो पुलिस इतनी जल्दबाजी में निष्कर्ष पर कैसे पहुंच गई? क्या सरकार उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी जिन्होंने इस प्रकरण को लेकर समाज में तनाव और आक्रोश फैलाया? क्या पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाएगी ताकि जनता का विश्वास बना रहे? क्या पुलिस पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन सार्वजनिक करेगी?

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उन्होंने कहा कि इतनी संवेदनशील घटना में मात्र 24 घंटे के भीतर जांच पूरी कर “फर्जी” करार देना कई सवाल खडे करता है। यह मामला केवल एक एफआईआर तक सीमित नहीं है बल्कि जनता के भरोसे, पुलिस की पारदर्शिता और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुडा हुआ है। यदि मामला वास्तव में फर्जी था तो सरकार और पुलिस को हर प्रश्न का स्पष्ट एवं प्रमाणिक उत्तर जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाल में ही एनसीआरबी के जो आंकडे जारी किये गये हैं उसमें उत्तराखण्ड राज्य मंे अपराध का प्रतिषत षीर्श पर है। जो राज्य की भाजपा सरकार की नाकामी का प्रतीक है। इस अवसर पर महिला कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष चंद्रकला नेगी, प्रदेश महासचिव निधि नेगी, देहरादून जिला अध्यक्ष पूनम सिंह, प्रदेश महासचिव सुशीला शर्मा, अनुराधा तिवारी आदि पदाधिकारी उपस्थित रहे

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