उत्तराखण्ड की भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियों के तकनीकी समाधान तलाशने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड इनोवेशन एंड सॉल्यूशंस हैकाथॉन-2026 का शुभारंभ हुआ। 90 दिनों तक चलने वाली इस पहल में युवाओं की तकनीकी प्रतिभा और नए विचारों को वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।
हैकाथॉन में आपदा प्रबंधन, यातायात एवं भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन और सुशासन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान तलाशे जाएंगे। प्रतिभागियों को उत्तराखण्ड की स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जैव प्रौद्योगिकी मंत्री श्री प्रदीप बत्रा ने किया। उन्होंने कहा कि एआई, डेटा एनालिटिक्स, जीआईएस और ड्रोन तकनीक का उपयोग शासन और जनसेवा को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकता है।
हैकाथॉन में AI आधारित सरकारी नॉलेज रिपॉजिटरी, सरकारी जानकारी को आसानी से खोजने व उपयोग करने वाली प्रणालियां, डीपीआर व रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तैयार करने में AI का उपयोग, डेटा गवर्नेंस, AI आधारित जीआईएस और पर्यावरणीय विश्लेषण जैसे विषयों पर भी समाधान विकसित किए जाएंगे। आपदा प्रबंधन, बुनियादी ढांचे के आकलन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए ड्रोन आधारित एरियल मॉनिटरिंग पर भी काम होगा।
उत्तराखण्ड में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए यातायात दबाव का पूर्वानुमान लगाने, पर्यावरणीय दबाव की निगरानी करने, आपदा संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने वाले तकनीकी समाधानों पर भी जोर रहेगा। दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच आसान बनाने के उपाय भी तलाशे जाएंगे।

More Stories
सहसपुर में सामान्य सुविधा केंद्र का शुभारंभ
डीजीपी ने की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
किशाऊ परियोजना को लेकर साइन हुआ MoU, गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में आगे बढ़े कदम