8 September 2026

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वंदेमातरम् को लेकर महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस को कोसा

वंदेमातरम् को लेकर महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस को कोसा

उत्तराखंड बीजेपी ने वंदे मातरम को लेकर कांग्रेसी रुख को विभाजनकारी राजनीति से प्रेरित बताते हुए, कठोर शब्दों में निंदा की है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रगीत के इतिहास, अर्थ और गौरवशाली विरासत को जन जन तक पहुँचाने के लिए पार्टी जनजागरण अभियान चलाने जा रही है। वहीं पूर्व सीएम हरदा की चिंता पर सुझाव दिया कि वे वरिष्ठ हैं, अपने कार्यकर्ताओं को वन्देमातरम के सम्मान के लिए प्रेरित करें। साथ ही कहा, जो फिलहाल पूर्ण राष्ट्रगीत गा नहीं सकते, वे कम से कम कानून सम्मत सम्मान तो दे ही सकते हैं। वंदेमातरम् को लेकर महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस को कोसा

पार्टी मुख्यालय में हुई पत्रकार वार्ता में उन्होंने दिल्ली में सम्पन्न भाजपा राष्ट्रीय कार्यसमिति के पहले राजनैतिक प्रस्ताव की जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सम्मान और उसके गायन के संवैधानिक अधिकार को लेकर, पार्टी किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करने वाली है। साथ ही हाल में कांग्रेस पार्टी की कार्यसमिति द्वारा 1937 के अपने विभाजनकारी प्रस्ताव को दोबारा स्वीकार करने और वंदे मातरम के केवल दो छंद गाने के निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा की है। पार्टी वंदेमातरम को अधूरा और विस्मृत करने के विपक्षी प्रयासों को असफल करने और राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान, स्वाभिमान और ऐतिहासिक महत्व को जन जन, विशेषकर युवाओं के बीच पहुंचने के उद्देश्य से जागरुकता अभियान चलाने जा रही है।

इस दौरान उन्होंने पार्टी के प्रस्ताव के कुछ मूल बिंदुओं की चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा, ‘वंदे मातरम’ पर कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के विभाजनकारी प्रस्ताव को पुनः स्वीकार करने के फैसले का कड़े शब्दों में विरोध करती है। भाजपा के लिए राष्ट्रीय स्वाभिमान, देशभक्ति और देश की अखंडता से बढ़कर कुछ भी नहीं है। यही वजह है कि पार्टी ने अपनी पहली राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण गायन के साथ संपन्न किया और गौरवशाली भारत की रक्षा के संकल्प को दोहराया है। भाजपा ‘वंदे मातरम’ को केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति श्रद्धा, स्वतंत्रता संग्राम का मूल मंत्र और राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक मानती है। ‘वंदे मातरम’ क्रांतिकारियों के बलिदान का प्रतीक है, जिसकी गरिमा की रक्षा के लिए भाजपा पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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उन्होंने कहा, कांग्रेस का यह प्रस्ताव बंटवारे का बीजारोपण करने जैसा है। 1937 में ‘वंदे मातरम’ के केवल प्रथम दो पदों को अपनाने के कांग्रेस के निर्णय ने ही देश में अलगाववाद और विभाजन की दीवार खड़ी की है। पार्टी का मानना है कि जानबूझकर राजनीतिक लाभ के लिए कांग्रेस ऐतिहासिक गलतियों की पुनरावृत्ति कर रही है। कांग्रेस ने 1930 के दशक में राष्ट्र-विरोधी सोच के आगे समर्पण किया था और आज फिर उसी तुष्टीकरण की नीति को अधिकृत रूप दे रही है। ऐतिहासिक तथ्यों बताते हुए कहा कि 1923 के काकीनाडा अधिवेशन में ‘वंदे मातरम’ गायन का मोहम्मद अली जिन्ना ने बतौर अध्यक्ष बहिष्कार किया था। आज भी उसी रवैये को कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व 15 अगस्त पर पार्टी मुख्यालय में दोहराता दिखाई देता है। इस पूरे प्रकरण से कांग्रेस नेताओं की झूठी राष्ट्रभक्ति बेनकाब हो गई है। क्योंकि जो पार्टी संविधान की प्रतियां लेकर घूमती है, वह राष्ट्रगीत के पूर्ण रूप से गाने के संवैधानिक और नैतिक अधिकार का विरोध कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा का सीधा-सीधा आरोप है कि वर्ग-विशेष के तुष्टीकरण के लिए कांग्रेस राष्ट्रगीत का अपमान कर रही है। क्योंकि स्वतंत्रता दिवस जैसे पावन अवसर पर भी कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत का पूरा गाने से रोकना और फिर उसी क्रम में अधूरे गायन का प्रस्ताव पारित करना इसका प्रमाण है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, महात्मा गांधी जी ने भी ‘वंदे मातरम’ को धर्म की परिधि से परे शुद्धतम राष्ट्रीय भावना बताया था। जबकि कांग्रेस ने वोट गांधी जी के नाम पर लिए, लेकिन उनकी इस विषय पर आधारित भावनाओं को हमेशा नज़रअंदाज़ किया है। वहीं 1937 के दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय के समय सी. राजगोपालाचारी ने भी चेताया था कि सांप्रदायिक दबाव के लिए किए गए समझौते हमेशा विवाद समाप्त नहीं करते; वे आगे की माँगों के लिए उदाहरण और आधार बन सकते हैं। आजादी के बाद देश के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल का यह कथन आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है। 24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम’ दोनों को समान संवैधानिक दर्जा दिया था। लेकिन पूर्व की सरकारों के तुष्टीकरण के चलते कभी ‘वंदे मातरम’ को उचित सम्मान नहीं दिया गया।

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उन्होंने कहा, मोदी सरकार ने देश के सम्मान, देशभक्ति के गान और देशवासियों के स्वाभिमान के प्रतीक ‘वंदे मातरम’ पर ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। वर्ष 2025 में संसद की ऐतिहासिक चर्चा से ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर इसके पूर्ण स्वरूप का आधिकारिक सम्मान स्थापित किया गया है। क्योंकि राष्ट्रगीत को कड़ा कानूनी संरक्षण दिया जाना जरूरी था। जिसके लिए ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित कर ‘वंदे मातरम’ के गायन में जानबूझकर व्यवधान डालने को दंडनीय अपराध बनाया गया।

लाल किले की प्राचीर से 15 अगस्त पर पहली बार ‘वंदे मातरम’ गायन बड़े हर्षोल्लास के साथ हुआ, जिससे राष्ट्रगीत को उसका खोया हुआ सर्वोच्च सम्मान मिला और देशवासियों को ‘वंदे मातरम’ का स्वाभिमान मिला।

पार्टी की राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक में 22 अगस्त को पहले ही निर्णय में ‘वंदे मातरम’ के सम्मान की रक्षा का संकल्प लिया गया है और आगामी कार्ययोजना तैयार की गई है। भाजपा के लिए यह विषय वोट बैंक की राजनीति से परे है। पार्टी का मानना है कि राष्ट्रगीत किसी दल की संपत्ति नहीं है और इसका सम्मान चुनावी गणित या वोट बैंक की सौदेबाजी से ऊपर है।

भाजपा देश की राजनीति में किसी भी तरह के सांप्रदायिक दबाव का डटकर विरोध करती आई है और राष्ट्रगीत को किसी भी प्रकार से राजनीतिक या सांप्रदायिक दबाव के आगे झुकने नहीं देगी। पार्टी के लिए संसद और संविधान सर्वोच्च प्राथमिकता में हैं, वहां से पारित कानून को देश के प्रत्येक नागरिक को मानना ही चाहिए। लिहाजा कांग्रेस या अन्य किसी भी पार्टी की कार्य समिति का कोई भी प्रस्ताव देश की संसद द्वारा पारित कानूनों और संवैधानिक संरक्षण से ऊपर नहीं हो सकता।

कहा, चूंकि एक लंबे समय तक देशवासियों को राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सम्मान को लेकर अंधेरे में रखने के प्रयास किए गए। इसलिए भाजपा कार्यकर्ता, देश के कोने-कोने में लोगों और विशेषकर युवाओं के बीच ‘वंदे मातरम’ का इतिहास, अर्थ और गौरवशाली विरासत पहुँचाने के लिए जन-जागरण अभियान चलाएगी। जनता को बताएँगे कि देश के अंदर जिस राष्ट्रगीत से पूरे आजादी के आंदोलन को बल मिला, उस राष्ट्रगीत का आज कांग्रेस अपमान कर रही है, इसको हम निश्चित रूप से इस विषय को लेकर जनता के बीच जाएँगे। इस पूरे विषय पर भाजपा का मत स्पष्ट है: ‘वंदे मातरम’ समूचे भारत का है, माँ भारती की वंदना है और इसके सम्मान की रक्षा के लिए भाजपा का हर कार्यकर्ता संकल्पबद्ध है।

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वहीं इस दौरान हरीश रावत द्वारा वन्देमातरम को जेन जी के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताने को लेकर पूछे सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हमें आश्चर्य होता है, इतने वरिष्ठ नेता इस प्रकार की बातों को कर रहे हैं। अच्छा होता, हरीश रावत सबसे आग्रह करते, वे कांग्रेस के बहुत वरिष्ठतम नेता हैं, आजादी के उन क्षणों को उन्होंने सुना होगा। इसलिए आजादी के इस गीत को सब लोगों को गाना चाहिए, इस प्रकार का आह्वान उनको अपने कार्यकर्ताओं में करना चाहिए।

वहीं पत्रकारों द्वारा पूरा वंदे मातरम याद नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कहा, दशकों तक कांग्रेस की सरकारों ने वंदेमातरम के पूर्ण स्वरूप को देश से छिपाया। आज बेशक लोगों को कम छंद कंठस्थ होंगे। लेकिन जब प्रतिदिन गायन का अभ्यास होता रहेगा तो धीरे धीरे वंदे मातरम हमारे व्यवहार में समाहित हो जाएगा। उसमें भी सबसे महत्वपूर्ण है राष्ट्रगीत को सम्मान देने का, आप गायन नहीं कर सकते लेकिन अपनी सभी गतिविधियों को विश्राम देकर सम्मान में खड़े तो हो सकते हैं। लेकिन वो बात और है कि कांग्रेस पार्टी को इतना सम्मान देना भी स्वीकार नहीं, क्योंकि उनको वोट बैंक नाराज होने का डर है।