29 July 2026

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उत्तराखंड में पंचायती राज की मजबूती को लेकर त्रिवेंद्र रावत के सवाल पर केंद्र ने दिया क्या जवाब?

उत्तराखंड में पंचायती राज की मजबूती को लेकर त्रिवेंद्र रावत के सवाल पर केंद्र ने दिया क्या जवाब?

हरिद्वार सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा लोकसभा में पूछे गए संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) से संबंधित प्रश्न के लिखित उत्तर में पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन सिंह’ ने बताया कि केंद्र सरकार पंचायतों को सक्षम, आत्मनिर्भर और प्रभावी स्थानीय स्वशासन की इकाई बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि पंचायती राज संस्थाएं राज्य का विषय होने के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के माध्यम से राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों के क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण एवं संस्थागत मजबूती के लिए सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

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पंचायती राज मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में देशभर में संशोधित RGSA के अंतर्गत 1.20 करोड़ से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधियों एवं पंचायत पदाधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है। वहीं उत्तराखंड में पिछले तीन वर्षों में 2,06,385 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता वृद्धि को विशेष महत्व देते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से डिजिटल शासन, ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP), योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। GPDP निर्माण में भी उत्तराखंड की प्रभावी भागीदारी रही है। इस प्रकार उत्तराखंड में पंचायत स्तर पर योजनाबद्ध विकास और डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

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सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में गांवों को विकास की मजबूत इकाई बनाने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान ने पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित कर उन्हें निर्णय लेने, योजना बनाने और विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम बनाया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां अन्य राज्यों से अलग हैं। ऐसे में प्रशिक्षित और सक्षम पंचायतें ही दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

रावत ने कहा कि पंचायती राज मंत्रालय द्वारा इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आनंद (IRMA) से कराए गए स्वतंत्र मूल्यांकन में भी RGSA के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मूल्यांकन में पाया गया कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों से पंचायतों की GPDP निर्माण, डिजिटल शासन, नागरिक भागीदारी और स्थानीय विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की क्षमता में वृद्धि हुई है।

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